नया भारत: एक सभ्यता का पुनर्जागरण (भाग - 1) (परंपरा, प्रगति और व्यवस्था की 'घुन' को मिटाने का मास्टर ब्लूप्रिंट) खंड 1: 'घुन' की पहचान - बीमारी का सही समय पर इलाज 1. पल्लू और पहिए का सटीक उदाहरण: हमारे समाज में एक बहुत सामान्य लेकिन गहरी बात कही जाती है—जब कोई महिला बाइक पर बैठती है, तो हर कोई उसे टोकता है कि "बहन, अपना पल्लू संभाल लो, कहीं पहिए में न फंस जाए।" यह क्या है? यह दुर्घटना होने से पहले खतरे को भांपकर उसे रोकने की एक समझ है। लेकिन दुर्भाग्य से, जब बात हमारे देश की प्रशासनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय संपदा की आती है, तो हम यह 'पल्लू' पहिए में फंसने देते हैं। हम तब तक इंतज़ार करते हैं जब तक दुर्घटना न हो जाए। एक राष्ट्र के रूप में हमें यह सीखना होगा कि खतरे, लापरवाही और 'घुन' (दीमक) को समय रहते पहचान कर उसका इलाज करना ही विकास की पहली शर्त है। बिना इस पहचान के, कोई भी विकास टिक नहीं सकता। 2. खरपतवार और किसान की समझ: एक सच्चा किसान जानता है कि अगर फसल में खरपतवार (Weeds) उग आए हैं, तो उसे शुरुआती दौर में ही उखाड़ फेंकना चाहिए। यदि किसान यह ...