लाहौर में कृष्ण नगर और राम गली जैसे पुराने हिंदू नामों की बहाली के पीछे की असली सच्चाई जानें। क्या यह पाकिस्तान का सांस्कृतिक प्रेम है या IMF से कर्ज पाने का 'फेक एजेंडा'? विभाजन के दशकों बाद, पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने लाहौर की कई प्रमुख सड़कों और चौकों के नामों में एक बड़ा बदलाव किया है। जो इलाके लंबे समय से 'इस्लामपुरा' या 'रहमान गली' के नाम से जाने जाते थे, उन्हें वापस उनके मूल हिंदू और सिख नामों—जैसे कृष्ण नगर, राम गली, जैन मंदिर चौक और लक्ष्मी चौक —में बदल दिया गया है। पहली नज़र में, यह कदम सांस्कृतिक संरक्षण (Cultural Preservation) और धार्मिक सहिष्णुता की एक शानदार मिसाल लगता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय कूटनीति (Geopolitics) और अर्थशास्त्र में कोई भी कदम बिना किसी छिपे हुए एजेंडे के नहीं उठाया जाता। सच्चाई यह है कि इस 'हेरिटेज रिवाइवल' के पीछे इतिहास का सम्मान कम और पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने की छटपटाहट ज्यादा है। आइए इसके मुख्य कारणों का गहराई से विश्लेषण करते हैं। 1. IMF और विश्व बैंक का दबाव: 'कटोरा खाली न रह जाए' ...
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